अस्पताल और इंश्योरेंस कंपनियों के झगड़े में फंसे मरीज, कैसे मिलेगा क्लेम, क्या रद्द होगी पॉलिसी, जानें सारे जवाब
बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच एक बार फिर विवाद गहरा गया है. बजाज एलियांज और केयर हेल्थ इंश्योरेंस पर अस्पतालों ने क्लेम सेटलमेंट में देरी और पुराने पैकेज रेट्स लागू करने का आरोप लगाया. जवाब में बीमा कंपनियां कहती हैं कि अस्पताल बिल बढ़ाकर दिखाते हैं और अतिरिक्त चार्ज लेते हैं. इस खींचतान से मरीजों में चिंता है.

देश में अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच खींचतान कोई नई बात नहीं है. हाल ही में बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस और केयर हेल्थ इंश्योरेंस का विवाद एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (AHPI) के साथ नया विवाद सामने आया. यह विवाद क्लेम चुकाने में देरी, नए अस्पतालों को पैनल में शामिल करने में समय, पैकेज रेट्स को अपडेट न करने और अतिरिक्त कागजात मांगने से जुड़ा है. इसी कारण AHPI ने कुछ समय के लिए बजाज एलियांज की कैशलेस सर्विस रोकने का ऐलान किया था. इससे एक सितंबर से करीब 15000 अस्पतालों में कैशलेस सर्विस पर सीधा असर होगा. ऐसे में अगर आपने भी हेल्थ इंश्योरेंस ले रखा है और आपकी इंश्योरेंस कंपनी का नाम कैशलेस सर्विस से बाहर हो जाता है, तो ऐसे में आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और इस समस्या से कैसे बचा जा सकता है, यह जानना जरूरी है.

Everything Is Unlimited @ 8533089973
विवाद क्यों हुआ
अस्पतालों का कहना है कि इंश्योरेंस कंपनियां इलाज के पैकेज रेट्स बढ़ाने के लिए तैयार नहीं होतीं और क्लेम सेटलमेंट में भी देरी करती हैं. इससे उनकी लागत पूरी नहीं हो पाती. वहीं इंश्योरेंस कंपनियों का कहना है कि कई अस्पताल इलाज का बिल जरूरत से ज्यादा बढ़ाकर पेश करते हैं और सामान्य सेवाओं को भी अलग से चार्ज करते हैं. दोनों तरफ से यह आरोप-प्रत्यारोप लंबे समय से चल रहा है.
इमरजेंसी फंड से तुरंत राहत पाए
जब अस्पताल और इंश्योरेंस कंपनी के बीच कैशलेस सुविधा को लेकर विवाद होता है, तो सबसे बड़ी दिक्कत मरीज या परिवार के सामने तुरंत पैसे की व्यवस्था करने की होती है. अगर आपके पास इमरजेंसी फंड है, तो आप बिना घबराए शुरुआती खर्च खुद मैनेज कर सकते हैं और बाद में रीइम्बर्समेंट क्लेम के जरिए इंश्योरेंस कंपनी से पैसा वापस पा सकते हैं. यह फंड ना केवल मेडिकल इमरजेंसी बल्कि नौकरी छूटने या किसी और अचानक आने वाले बड़े खर्च में भी आपके काम आता है. इसलिए सलाह दी जाती है कि 6 से 9 महीने का खर्च लिक्विड फॉर्म (जैसे FD, सेविंग्स अकाउंट या लिक्विड फंड्स) में अलग से रखें.
पॉलिसी पोर्ट कर बेहतर विकल्प
अगर आपकी मौजूदा इंश्योरेंस कंपनी बार-बार कैशलेस नेटवर्क को लेकर समस्या पैदा कर रही है, तो आप अपनी पॉलिसी को दूसरी कंपनी में पोर्ट कर सकते हैं. इससे आपके अब तक के फायदे (जैसे नो क्लेम बोनस, वेटिंग पीरियड) बने रहते हैं और आपको बेहतर कैशलेस नेटवर्क, तेज सर्विस और संभवतः सस्ती प्रीमियम का फायदा मिलता है. पॉलिसी पोर्ट करने का रिक्वेस्ट पॉलिसी रिन्यूअल से कम से कम 45 दिन पहले देना जरूरी होता है. इस कदम से आप ऐसे विवादों से काफी हद तक बच सकते हैं और ज्यादा भरोसेमंद इंश्योरेंस कंपनी चुन सकते हैं.


