
नई दिल्ली: कांग्रेस की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने मंगलवार को गाजा में इजराइली सेना के सैन्य अभियान को नरसंहार बताया. इस मामले पर उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर निशान साधा है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार मानवता के इस अपमान पर मूकदर्शक बनी है. ऐसा करके सरकार संवैधानिक मूल्यों के साथ विश्वासघात कर रही है.
सोनिया गांधी ने एक दैनिक अखबार में हिंदी में लेख लिखा, जिसमें उन्होंने इजराइली सैन्य बलों की नाकेबंदी और वहां के हालातों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि गाजा के हालात भयावह बन गए हैं. इस वजह से यहां के लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं. वहीं, सोनिया गांधी ने पीएम मोदी से आग्रह किया कि वह उस विरासत के बारे में ‘स्पष्ट, निर्भीक और स्पष्ट’ ढंग से बोलें, जिसका प्रतिनिधित्व भारत ने लंबे समय से किया है. उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में निर्दोष पुरुषों, महिलाओं और बच्चों पर हमास के बर्बर हमलों या उसके बाद इजरायली बंधकों को लगातार बंधक बनाए रखने को कोई भी उचित नहीं ठहरा सकता.
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्य के रूप में और उससे भी अधिक मनुष्य के रूप में यह स्वीकार करना हमारी जिम्मेदारी है कि गाजा की नागरिक आबादी के खिलाफ इजरायल सरकार की प्रतिक्रिया और प्रतिशोध न केवल गंभीर है, बल्कि पूरी तरह से आपराधिक है. उन्होंने यह लेख हिंदी में लिखा. सोनिया गांधी ने बताया कि पिछले लगभग दो वर्षों में 55 हजार से अधिक फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए हैं, जिनमें 17 हजार बच्चे भी शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि गाजा में अधिकांश आवासीय इमारतें, जिनमें अस्पताल भी शामिल हैं, लगातार हवाई बमबारी के कारण ध्वस्त हो गई हैं, तथा सामाजिक ताना-बाना पूरी तरह से बिखर गया है. पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अक्टूबर 2023 से अब तक की घटनाएं विचलित करने वाली रही हैं, और हाल के महीनों में स्थिति और भी हृदयविदारक हो गई है. हमने देखा है कि कैसे एक कायराना रणनीति के तहत मानवीय सहायता को हथियार बनाया गया है. इजराइली रक्षा बलों ने गाजा पर सैन्य नाकाबंदी लगा दी है, और जानबूझकर और क्रूरतापूर्वक आबादी तक दवाओं, भोजन और ईंधन की आपूर्ति रोक दी है.
सोनिया गांधी ने कहा कि बुनियादी ढांचे के विनाश और नागरिकों के बेलगाम नरसंहार ने एक मानव-निर्मित त्रासदी को जन्म दिया है, जिसे नाकेबंदी ने और भी बदतर बना दिया है. जबरन भुखमरी की यह रणनीति निस्संदेह मानवता के विरुद्ध अपराध है. उन्होंने कहा कि इस तबाही के बीच, इजराइल ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्री संगठनों से मानवीय सहायता को या तो पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया है या अवरुद्ध कर दिया है. मानवता की हर अवधारणा को विकृत करते हुए, इजराइली रक्षा बलों के सशस्त्र सैनिकों ने अपने परिवारों के लिए भोजन जुटाने की कोशिश कर रहे सैकड़ों नागरिकों पर बेरहमी से गोलीबारी की. संयुक्त राष्ट्र ने स्वयं इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और इजराइली रक्षा बलों को भी इस भयावह सच्चाई को स्वीकार करना पड़ा है.
अपने लेख में सोनिया गांधी ने लिखा कि गाजा पर इजरायल के चल रहे सैन्य कब्जे पर विशेषज्ञों द्वारा किए गए लगभग सभी वस्तुनिष्ठ आकलनों के अनुसार, यह एक ऐसा अभियान है जो नरसंहार के बराबर है और इसका उद्देश्य गाजा पट्टी से फिलिस्तीनियों का जातीय सफाया करना है. इसका पैमाना और परिणाम 1948 की नक्बा त्रासदी की याद दिलाते हैं, जब फिलिस्तीनियों को अपने घरों से निकाल दिया गया था. गांधी ने दावा किया कि ये सभी अत्याचार कुछ सबसे नापाक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किए जा रहे हैं – औपनिवेशिक मानसिकता से लेकर कुछ ‘लालची’ रियल एस्टेट टाइकून के स्वार्थी हितों तक.
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि मौजूदा संकट ने अंतरराष्ट्रीय प्रणाली की सबसे गंभीर कमजोरियों में से एक को उजागर कर दिया है. उन्होंने कहा कि गाजा में तत्काल, बिना शर्त और स्थायी युद्धविराम की मांग करने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्तावों की पूरी तरह से अनदेखी की गई है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद गाजा में नागरिकों पर हमलों और उसके बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर नष्ट करने के लिए इजरायल सरकार पर प्रतिबंध लगाने में विफल रही है.

